पिता ने घर-घर दूध पहुंचाया-वैन चलाई, खुद अखबार बेचते थे..जानिए इस अंडर-19 टीम के कैप्‍टन के बारे में….

मुंबई 4 दिसंबर 2019 युवराज सिंह, मोहम्‍मद कैफ, विराट कोहली, सुरेश रैना. ये कुछ उन खिलाड़‍ियों के नाम हैं जिन्‍होंने अंडर-19 वर्ल्‍ड क्रिकेट में जलवा बिखेरा और नेशनल टीम में आ गए. कुछ ऐसा ही सपना है मेरठ के प्रियम गर्ग का. अगले साथ साउथ अफ्रीका में अंडर-19 वर्ल्‍ड कप होना है. प्रियम को भारत का कप्‍तान बनाया गया है. टीम में कई खिलाड़ी हैं जो अभावों से उठकर यहां तक पहुंचे हैं. कप्‍तान की कहानी थोड़ी खास है.

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प्रियम 11 साल के थे जब मां उन्‍हें छोड़कर चली गईं. उन्‍होंने द इंडियन एक्‍सप्रेस से कहा, “मैं बहुत छोटा था कि समझ पाऊं क्‍या हो रहा है. जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मुझे (मां की) कमी महसूस हुई जो कभी पूरी ना हो सकी. पापा और बहनों ने मेरा ध्‍यान रखा. मेरे पापा ने मेरे लिए बहुत सैक्रिफाइस (त्‍याग) किए हैं.”

गर्ग के पापा घर-घर जाकर दूध बेचते थे. रात को प्रियम के सिरहाने 10 रुपये का नोट छोड़ जाते ताकि वो सुबह प्रैक्टिस के लिए मेरठ जा पाए. प्रियम गर्ग के लिए ये वो दिन थे जब बस में धक्‍के खाते हुए वो सोचते थे कि कभी इतना पैसा कमा पाएंगे कि पापा को भरपेट खिला सकें. अंडर-19 वर्ल्‍ड कप टीम में कप्‍तानी के जरिए प्रियम ने उस ओर एक बड़ा कदम उठा दिया है.

प्रियम कहते हैं, “पापा ने सब मुश्किल काम किए, हर वो चीज जो आप सोच सकते हो. दूध बेचना, स्‍कूल वैन चलाना, माल चढ़ाना… वो बस ये चाहते थे कि मेरी जिंदगी अच्‍छी रहे. उन्‍होंने सबकुछ सहा ताकि एक दिन मुझे क्रिकेटर बनता देख सकें. मुझे मेरठ ले गए ताकि मुझे अच्‍छी एकेडमी मिले.”

अकेले एकेडमी नहीं जाने देते थे पापा

प्रियम गर्ग का परिवार परीक्षितगढ़ में रहता है. पापा कभी-कभी 20 किलोमीटर दूर एकेडमी तक साथ आते थे. अगर वो नहीं तो पांच बहनों से से कोई ना कोई जरूर प्रियम के साथ होता था. ऐसा तब तक चला जब तक पापा मुतमईन ना हो गए कि बेटा खुद आ-जा सकता है.

मेरठ यूं तो तेज गेंदबाज पैदा करने को मशहूर है, मगर प्रियम खालिस बल्‍लेबाज हैं. प्रवीण कुमार और भुवनेश्‍वर कुमार की धरती से निकले इस खिलाड़ी ने पिछले साल अपना पहला रणजी टूर्नामेंट खेला. उत्‍तर प्रदेश के लिए प्रियम ने 867 रन बनाए.

बहुत से युवाओं की तरह प्रियम भी सचिन तेंदुलकर को देख क्रिकेट की ओर खिंचे चले आए. घर में टीवी नहीं था तो पास के शोरूम जाकर मैच देखते थे.

आज प्रियम के पापा, नरेश यूपी के हेल्‍थ डिपार्टमेंट में ड्राइवर हैं. उन्‍होंने कहा कि वो क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं जानते. नरेश ने कहा, “एक दिन मैं राहुल द्रविड़ से मिला. उन्‍होंने मुझसे कहा कि परेशान मत होइए, आपका बेटा बहुत आगे जाएगा. मैं उस दिन बेहद खुश था.”

प्रियम के पिता का सपना है कि उनका बेटा इंटरनेशनल क्रिकेट में टीम इंडिया की तरफ से खेले.