छत्तीसगढ़ के गांव , गौठान और महिला स्वावलंबन की पहचान है बनचरौदा -सुब्रत साहू

 

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* प्रमुख सचिव  सुब्रत साहू ने
बनचरौदा गौठान के एक-एक गतिवधियों का अवलोकन किया

* खुले दिल से तारीफ, अधिकारी कर्मचारी गांव विकास के कार्यो को बढ़ावा दें

रायपुर, 3 दिसम्बर 2019। छत्तीसगढ़ राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुब्रत साहू ने आज रायपुर जिले के आरंग विकासखण्ड के बनचरौदा गौठान का मुआयना किया और यहां संचालित एक-एक गतिवधियों की बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने गौठान की खुले दिल से तारीफ की और अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे ‘‘ नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी ’’ के तहत् ऐसे कार्यो को बढ़ावा दे, जो गांव के विकास के साथ-साथ वहां के ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं कों स्वरोजगार प्रदान करने में सहायक बनें।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अपना पदभार ग्रहण करने के बाद ही स्पष्ट कर दिया था कि वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्रामीण अर्थव्यवस्था के स्वावलंबन को फिर से मूर्त रूप देना चाहते हैं। यही कारण है कि उन्होंने ‘‘ नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी ’’ की अवधारणा का ना केवल संदेश दिया बल्कि बहुत कम समय में इसे धरातल पर सफलता की सीढ़ियों की ओर अग्रसर भी किया। इस अवधारणा का एक जीता जागता जीवंत उदाहरण बनचरौदा है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत भी मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के साथ यहां आयें। मुख्य सचिव श्री आर.पीे.मण्डल ने ना केवल इसे प्रदेश भर के लिये आदर्श गौठान बताया बल्कि अधिकारियों को निर्देशित भी किया कि वे समय निकालकर इसका अवलोकन करें।
इसी तारतम्य में प्रमुख सचिव ने आज भ्रमण के दौरान गौठान संचालन समिति के सदस्यों से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। सरपंच श्री कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि गांव के खाली पड़े 3.5 एकड़ भूमि में यहां गौठान बनाया गया है। यहां पहले से वृक्ष मौजूद थे जिन्होंने यहां आने वाले पशुओं के लिये छाया देने का कार्य किया, गौठान बनने के बाद यहां सोलर चलित एक ट्यूबवेल लगाया गया, पशुओं को पानी पीने के लिय जगह-जगह कोटना बनाये गये, पशुओं के गोबर से खाद बनाने के लिये नाडेप टंकी और वर्मी कम्पोस्ट टंकी बनायी गयी, पशु चारे के लिए एजोला टेंक बनाया गया। पशुओं को सुरक्षित कैम्पस देने के लिये चारो और फेंसिंग और सीपीटी एवं डब्ल्यूएटी का घेरा बनाया गया। इनके बीच हल्दी, फूल एवं फलदार वृक्ष लगाये गयें। गौठान के भीतर पशु उपचार के लिये ट्रेविश लगाया गया और चरवाहाघर की व्यवस्था भी की गयी।
प्रमुख सचिव ने गौठान के समीप बनाये गये चारागाह और बाड़ी का अवलोकन भी किया। यहां उपलब्ध 12 एकड़ की जमीन की 7 एकड़ की भूमि को गांव के चारागाह और 5 एकड़ में बाड़ी विकसित की गयी है। चारागाह में एक अन्य ट्यूबवेल भी स्थापित किया गया है और यहां पशुओं के लिये नेपियर घास, चरी, बर्सीम आदि लगाकर हरा चारा की व्यवस्था की गयी है। महिला ग्राम संगठन सहायिका श्रीमती टिकेश्वरी चन्द्राकर ने बताया कि यहां 5 एकड़ सिंचित क्षेत्र में दो महिला समूहों द्वारा सब्जी बाड़ी का कार्य किया जा रहा है। मनरेगा के माध्यम से एक छोटी डबरी का निर्माण भी किया गया है, जिसमें महिला समूह द्वारा रोहु, कतला, मृगल प्रजातियों की मछली का पालन किया जा रहा है। यहां गैंदा, रजनीगंधा के फूल का उत्पादन भी किया जा रहा है।

श्री सुब्रत साहू ने वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण की 12 इकाईयों का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि ग्राम में करीब छः सौ मवेशी और करीब 30 आवारा पशु है। गांव के मवेशियों को यहां प्रतिदिन सुबह चरवाहों द्वारा लाया जाता है और जो उनके डे-केयर सेंटर की तरह कार्य करता है। अब यहां आवारा पशु के कारण होने वाले सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आयी है। सबसे बड़ी बात है भारतीय संस्कृति में माॅ की तरह पूजे जाने वाली गाय के गोबर और मूत्र का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट और जैविक दवाई बनाने में होने लगा है।
गोबर से दीये, गमला अन्य सामान बनाने वाली महिला स्व-सहायता समूहों की ख्याति इतनी अधिक बढ़ी है कि इस बार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक उनके दीये हाथों-हाथ बिके और एडवांस बुकिंग की गयी। पहले ही दिवाली त्यौहार में तीन लाख रूपये के दीये महिलाओं ने बेचे। गोबर से यहां बिजली उत्पन्न करने और इनसे चाप कटर, मोबाईल चार्जर, धान कुटाई मशीन, थ्रेसर संचालित करने का कार्य किया जाता है।
यह भी उल्लेखनीय उपलब्धि है कि विभिन्न प्रशिक्षणों, मार्गदर्शन तथा बिहान योजना द्वारा वित्तीय सहयोग से गांव की महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार का ऐसा माध्यम मिला है जिन्हांेने उनकी जिंदगी में आश्चर्यजनक बदलाव ला दिया है। महिला समूहों द्वारा यहां बेल्वेट कोटेड पेंसिल एवं पेन बनाने, मुर्गीपालन करने, साबुन निर्माण, अगरबत्ती निर्माण करने एवं छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के कैंटीन संचालन का कार्य भी किया जा रहा है। राष्ट्रीय बेम्बू मिशन द्वारा महिला समूहों द्वारा गांव में बहुतायत से उपलब्ध पत्तों से दोना बनाने और बांस शिल्प का कार्य भी किया जा रहा है।
श्री सुब्रत साहू ने यहां अजोला टैंक, राईस मिल, पल्वराईजर मशीन, पैलेट निर्माण मशीन, टपक सिंचाई के साथ निर्माणाधीन बायोगैस संयंत्र का भी अवलोकन किया। भेंट के समय महिलाओं ने बताया कि उन्हें अब अच्छी खासी आमदानी हो रही है तथा वे और उनके घर के सदस्य गांव में आये इस परिर्वतन से बेहद खुश है।

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